तो जीवन के एक और वर्ष को आज पीछे छोड़, एक नए वर्ष की ओर कदम बढ़ा दिया...
जन्मदिन हर साल आता है, लेकिन हर बार अपने साथ कुछ नया अनुभव, कुछ नए प्रश्न और कुछ नई सीख छोड़ जाता है।
एक समय था, जब शुभकामनाओं की संख्या भी कम लगती थी। लगता था, जितने अधिक लोग याद करें, उतना ही अधिक अपना होना प्रमाणित होता है। हजार शुभकामनाएं भी कम लगती थीं और उस भीड़ में अपनापन सच भी लगता था।
लेकिन उम्र के साथ शायद समझ भी थोड़ी परिपक्व हुई है। अब संख्या नहीं, स्नेह की गहराई मायने रखती है। इस बार शुभकामनाएं अपेक्षाकृत कम थीं, मगर उनमें अपनापन कहीं अधिक था। ऐसी शुभकामनाएं, जो किसी ऐप की याद दिलाने पर नहीं, बल्कि किसी के दिल और जेहन में मुझे याद रखकर दी गईं। किसी ने समय निकालकर याद किया, किसी ने मन से शब्द चुने, किसी ने दूर रहकर भी अपनी उपस्थिति का एहसास कराया और कुछ शुभकामनाओं में ऐसी मासूम आत्मीयता थी, जिसने मन को विशेष रूप से छू लिया।
शायद इस जन्मदिन की सबसे खूबसूरत उपलब्धि यही रही कि इस बार मैंने शुभकामनाओं को गिना नहीं, उन्हें महसूस किया। समझ आया कि बहुत सारे शब्दों से कहीं अधिक मूल्यवान वे कुछ शब्द होते हैं, जो किसी की स्मृति में बिना किसी बाहरी याद दिलाए अपने आप जन्म लेते हैं। सच्चे अपनत्व के लिए भीड़ नहीं, कुछ अपने लोगों की याद ही काफी होती है।
पिछले कुछ वर्षों ने आंखों पर पड़े स्वप्नों के पर्दे धीरे-धीरे हटा दिए। बहुत सी सच्चाइयां सामने आईं, कुछ भ्रम टूटे, कुछ रिश्तों के अर्थ बदले और जीवन को देखने का नजरिया भी। अब उम्र के एक और पड़ाव पर पहुंचने से पहले जीवन को थोड़ा और सार्थक कर लेने की इच्छा है।
साथ ही, मन ने कुछ पुराने क्लेश और कलुष पीछे छोड़ने की कोशिश भी की है। लोगों को खुले मन से क्षमा करना और स्वयं को भी उन बोझिल भावनाओं से मुक्त करना सीखा है। शायद यही वजह है कि अब Go with the flow का अर्थ समझ आने लगा है। जीवन का बहाव बना रहे, निरंतरता बनी रहे और भीतर की स्वच्छता भी... शायद इससे सुंदर जीवन-दर्शन और क्या होगा!
और हां... एक कोशिश लगातार जारी है। जब तक जीवन है, अपने भीतर के software को update करते रहना है, समय के साथ स्वयं को upgrade करते रहना है। आखिर जिंदगी में latest version बने रहने के लिए उम्र नहीं, सीखने की इच्छा जरूरी है। 😃
इस वर्ष की एक और महत्वपूर्ण सीख रही... अपेक्षाएं कम रखो।
क्योंकि जब अपेक्षाएं कम होती हैं, तब जो मिलता है, वह बहुत अधिक महसूस होता है। अपेक्षाएं अक्सर खुशियों के बीच अपनी शर्तें रख देती हैं और फिर वही शर्तें दुख का कारण बन जाती हैं। इसलिए अब जो मिले, उसे कृतज्ञता से स्वीकार करने और जो न मिले, उसे सहजता से जाने देने की कोशिश है।
आज के इस दिन में मेरे माता-पिता, भाई, बिटिया, परिवार, आशा स्कूल का पूरा स्टाफ, बचपन के साथी, स्कूल के सहकर्मी, मेरे वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व और वर्तमान... सभी किसी न किसी रूप में मेरे साथ रहे।
कुछ लोग Facebook, StarMaker जैसे आभासी माध्यमों से जुड़े थे, लेकिन समय ने उनमें से कुछ रिश्तों को वास्तविक जीवन की आत्मीयता में बदल दिया। कुछ अप्रत्याशित शुभकामनाएं मिलीं, कुछ बेहद खूबसूरत सरप्राइज मिले और कुछ लोगों ने ऐसे छोटे-छोटे प्रयास किए, जिन्होंने मुझे भावुक कर दिया।
आप सबने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कभी न कभी मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी है, मेरी खुशियों के लिए प्रार्थना की है और अपने स्नेह से मेरे हिस्से का थोड़ा-सा बोझ हल्का किया है। शायद यही छोटी-छोटी आत्मीयताएं हमें यह एहसास कराती हैं कि हमें भी स्वयं को महत्वपूर्ण समझने, अपने लिए खुश होने और प्यार महसूस करने का पूरा अधिकार है।
कहते हैं, खुशियां बांटने से बढ़ती हैं... और आज यह बात फिर सच लगी। मेरे इस दिन को खास महसूस कराने के लिए आप सबने अपना समय, अपना स्नेह और अपने भाव दिए। मेरी खुशी को केवल दोगुना नहीं, सच में अगुणित कर दिया।
आज शब्द कुछ कम पड़ रहे हैं... क्योंकि कुछ भाव शब्दों में कहे नहीं जाते, केवल महसूस किए जाते हैं।
बस आंखों के कोरों पर थोड़ी नमी है और मन के नेपथ्य में पूरे दिन का घटनाक्रम चलचित्र की तरह चल रहा है... एक-एक शुभकामना, एक-एक संदेश, एक-एक मुस्कान और एक-एक अपनापन।
आप सबकी शुभकामनाएं मेरे लिए केवल आज की खुशी नहीं, मेरी पूंजी हैं। ऐसी पूंजी, जिसकी जरूरत आगे भी हर उस मोड़ पर रहेगी, जहां जीवन मुझे स्वयं से थोड़ा और आगे बढ़ने को कहेगा।
आप सभी का हृदय की गहराइयों से आभार...
मेरी खुशियों में शामिल होने के लिए,
मुझे याद रखने के लिए,और सबसे बढ़कर... मुझे यह महसूस कराने के लिए कि मैं भी किसी के लिए महत्वपूर्ण हूं। ❤️🙏
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