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बुधवार, 30 सितंबर 2026

आभार पोस्ट जन्मदिन विशेष (29/09)

 


तो जीवन के एक और वर्ष को आज पीछे छोड़, एक नए वर्ष की ओर कदम बढ़ा दिया...

जन्मदिन हर साल आता है, लेकिन हर बार अपने साथ कुछ नया अनुभव, कुछ नए प्रश्न और कुछ नई सीख छोड़ जाता है।

एक समय था, जब शुभकामनाओं की संख्या भी कम लगती थी। लगता था, जितने अधिक लोग याद करें, उतना ही अधिक अपना होना प्रमाणित होता है। हजार शुभकामनाएं भी कम लगती थीं और उस भीड़ में अपनापन सच भी लगता था।

लेकिन उम्र के साथ शायद समझ भी थोड़ी परिपक्व हुई है। अब संख्या नहीं, स्नेह की गहराई मायने रखती है। इस बार शुभकामनाएं अपेक्षाकृत कम थीं, मगर उनमें अपनापन कहीं अधिक था। ऐसी शुभकामनाएं, जो किसी ऐप की याद दिलाने पर नहीं, बल्कि किसी के दिल और जेहन में मुझे याद रखकर दी गईं। किसी ने समय निकालकर याद किया, किसी ने मन से शब्द चुने, किसी ने दूर रहकर भी अपनी उपस्थिति का एहसास कराया और कुछ शुभकामनाओं में ऐसी मासूम आत्मीयता थी, जिसने मन को विशेष रूप से छू लिया।


शायद इस जन्मदिन की सबसे खूबसूरत उपलब्धि यही रही कि इस बार मैंने शुभकामनाओं को गिना नहीं, उन्हें महसूस किया। समझ आया कि बहुत सारे शब्दों से कहीं अधिक मूल्यवान वे कुछ शब्द होते हैं, जो किसी की स्मृति में बिना किसी बाहरी याद दिलाए अपने आप जन्म लेते हैं। सच्चे अपनत्व के लिए भीड़ नहीं, कुछ अपने लोगों की याद ही काफी होती है।


पिछले कुछ वर्षों ने आंखों पर पड़े स्वप्नों के पर्दे धीरे-धीरे हटा दिए। बहुत सी सच्चाइयां सामने आईं, कुछ भ्रम टूटे, कुछ रिश्तों के अर्थ बदले और जीवन को देखने का नजरिया भी। अब उम्र के एक और पड़ाव पर पहुंचने से पहले जीवन को थोड़ा और सार्थक कर लेने की इच्छा है।


साथ ही, मन ने कुछ पुराने क्लेश और कलुष पीछे छोड़ने की कोशिश भी की है। लोगों को खुले मन से क्षमा करना और स्वयं को भी उन बोझिल भावनाओं से मुक्त करना सीखा है। शायद यही वजह है कि अब Go with the flow का अर्थ समझ आने लगा है। जीवन का बहाव बना रहे, निरंतरता बनी रहे और भीतर की स्वच्छता भी... शायद इससे सुंदर जीवन-दर्शन और क्या होगा!


और हां... एक कोशिश लगातार जारी है। जब तक जीवन है, अपने भीतर के software को update करते रहना है, समय के साथ स्वयं को upgrade करते रहना है। आखिर जिंदगी में latest version बने रहने के लिए उम्र नहीं, सीखने की इच्छा जरूरी है। 😃


इस वर्ष की एक और महत्वपूर्ण सीख रही... अपेक्षाएं कम रखो।


क्योंकि जब अपेक्षाएं कम होती हैं, तब जो मिलता है, वह बहुत अधिक महसूस होता है। अपेक्षाएं अक्सर खुशियों के बीच अपनी शर्तें रख देती हैं और फिर वही शर्तें दुख का कारण बन जाती हैं। इसलिए अब जो मिले, उसे कृतज्ञता से स्वीकार करने और जो न मिले, उसे सहजता से जाने देने की कोशिश है।


आज के इस दिन में मेरे माता-पिता, भाई, बिटिया, परिवार, आशा स्कूल का पूरा स्टाफ, बचपन के साथी, स्कूल के सहकर्मी, मेरे वरिष्ठ अधिकारी, पूर्व और वर्तमान... सभी किसी न किसी रूप में मेरे साथ रहे।


कुछ लोग Facebook, StarMaker जैसे आभासी माध्यमों से जुड़े थे, लेकिन समय ने उनमें से कुछ रिश्तों को वास्तविक जीवन की आत्मीयता में बदल दिया। कुछ अप्रत्याशित शुभकामनाएं मिलीं, कुछ बेहद खूबसूरत सरप्राइज मिले और कुछ लोगों ने ऐसे छोटे-छोटे प्रयास किए, जिन्होंने मुझे भावुक कर दिया। 


आप सबने प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कभी न कभी मुझे आगे बढ़ने की ताकत दी है, मेरी खुशियों के लिए प्रार्थना की है और अपने स्नेह से मेरे हिस्से का थोड़ा-सा बोझ हल्का किया है। शायद यही छोटी-छोटी आत्मीयताएं हमें यह एहसास कराती हैं कि हमें भी स्वयं को महत्वपूर्ण समझने, अपने लिए खुश होने और प्यार महसूस करने का पूरा अधिकार है।

कहते हैं, खुशियां बांटने से बढ़ती हैं... और आज यह बात फिर सच लगी। मेरे इस दिन को खास महसूस कराने के लिए आप सबने अपना समय, अपना स्नेह और अपने भाव दिए। मेरी खुशी को केवल दोगुना नहीं, सच में अगुणित कर दिया।

आज शब्द कुछ कम पड़ रहे हैं... क्योंकि कुछ भाव शब्दों में कहे नहीं जाते, केवल महसूस किए जाते हैं।


बस आंखों के कोरों पर थोड़ी नमी है और मन के नेपथ्य में पूरे दिन का घटनाक्रम चलचित्र की तरह चल रहा है... एक-एक शुभकामना, एक-एक संदेश, एक-एक मुस्कान और एक-एक अपनापन।


आप सबकी शुभकामनाएं मेरे लिए केवल आज की खुशी नहीं, मेरी पूंजी हैं। ऐसी पूंजी, जिसकी जरूरत आगे भी हर उस मोड़ पर रहेगी, जहां जीवन मुझे स्वयं से थोड़ा और आगे बढ़ने को कहेगा।


आप सभी का हृदय की गहराइयों से आभार...

मेरी खुशियों में शामिल होने के लिए,

मुझे याद रखने के लिए,और सबसे बढ़कर... मुझे यह महसूस कराने के लिए कि मैं भी किसी के लिए महत्वपूर्ण हूं। ❤️🙏


#ब्रह्मनाद #गुड़िया #डॉ_मधूलिका 

मंगलवार, 29 सितंबर 2026

विश्व हृदय दिवस विशेष ❤️

 



आज विश्व हृदय दिवस है… ❤️


तो आज थोड़ा सा मेरी सुनिए और दिल को थोड़ी तवज्जो दे दीजिए।बेचारा सालों से हमारी हर बेवकूफी सहता है,हर तनाव झेलता है, हर चिंता पचाता है…कभी किसी के लिए धड़कता है..... कभी किसी की बेरुखी में टूटता है.....और कभी किसी के दिए दर्द पर चुपचाप कहता है कि “भाई… अब तो रिपेयरिंग की जरूरत है” 😏

हम भी बड़े कमाल के लोग हैं। दूसरों को सलाह देते हैं.... दिल बड़ा रखो। लेकिन अपने दिल के लिए न समय है, न नींद का हिसाब, न खाने की फिक्र, न व्यायाम की आदत।हाँ, तनाव लेने में हम पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं। 😂

दिल की सेहत की याद भी तब आती है,

जब डॉक्टर कहता है .....अब आपके दिल को खोलना पड़ेगा।....मेरा मतलब ओपन हार्ट या हार्ट सर्जरी। 

तो आज दिल से एक वादा कीजिए…

दिल खोलकर जिएँ, खुलकर हँसें, खुशियाँ बाँटें, गिले-शिकवे कम करें और अपने दिल के स्वास्थ्य का भी ख्याल रखें।

क्योंकि…

दिल खोलकर जीना बहुत अच्छी बात है,

मगर जीने के लिए दिल खुलवाना पड़े,

ये ऑफर किसी को नहीं चाहिए😂😂 😜

और हाँ…

दिल आपका है, इसे दूसरों के हवाले करने से पहले थोड़ा अपने हिस्से में भी रखिए।

Happy World Heart Day ❤️

#ब्रह्मनाद 

#डॉ_मधूलिका 

सोमवार, 21 सितंबर 2026

अंतर्राष्ट्रीय_शांति_दिवस (International Day of Peace ) 21 सितंबर

 




अरे पता वो आदमी ऐसा है.....राम राम वो औरत वैसी है ... उसके लाइफ कैसी चल रही, यार कोई चटपटी खबर बताओ फलाने के बारे में। तमाम खुसुर -पुसुर ,काना- फूसी,तांक झांक और सुन चंपा -सुन तारा के बीच आपको बता दूं कि आज अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस है। 


#अंतर्राष्ट्रीय_शांति_दिवस (International Day of Peace ) को पूरी दुनिया में अहिंसा और संघर्ष विराम के रूप में माना जाता है. दुनिया में जहां भी युद्ध चल रहा है, इस दिन उनसे अपने विवाद खत्म करने की उम्मीद की जाती है, ताकि वे आपसी झगड़ों को खत्म करके शांति से रह सकें।


अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बात अभी जाने दीजिए….. व्यक्तिगत स्तर पर आइये।

इंसान की सबसे बड़ी तलाश क्या है? सुकून ....शांति। कोविड 19 के साथ दो वर्ष सभी के जीवन के लिए बेहद अशान्तिपूर्ण और अस्थिर साबित हुए। थोड़े देर पहले किसी से बात हुई,और उसके बारे में खबर आती की वो इंसान भौतिक जगत से जा चुका। सब सुनते जानते हैं कि जीवन क्षणभंगुर है ,पर महसूस सबने इस महामारी के दौरान किया ही होगा। और ऐसी स्थिति में जीने के बावजूद हमारे अंदर इतना कलुष बचा की हम अपने जीवन के क्षण क्षण को सुकून और शांति से जीने के पश्चात दूसरों के जीवन की खोजबीन और उसे नीचा दिखाने में जाया करते रहे??????

माना कि कोई बहुत महान ,और दूसरा निकृष्ट होगा ....... पर न्यायाधीश बनने का हक हमें किसने दिया!!!! कई बार तो न्याय करने वालों को भी कठघरे में खड़ा पाया।

शारीरिक या मानसिक वृत्ति से हममें से कोई भी इतना पवित्र नहीं कि दूसरे पर उंगली उठाने की पात्रता अर्जित कर सकें। क्यों किसी को इतना मानसिक त्रस्त कर देते हम की आत्मघात के अलावा उसे रास्ता न सूझे। तथाकथित सेलेब्रिटीज़ की मौत पर हम सबने घड़ियाली आंसू बहाए.. पर भूल जाते हम ही कई बार उस भीड़ का हिस्सा होते जो किसी इंसान के कुछ क्षम्य दोष के लिए उससे जानवरों से भी बुरा व्यवहार करने लगते। क्यों हमने शांति से जीवन जीना नहीं जाना। हम अपने पड़ोसी आक्रमणकारी देशों को बुरा मानते ,पर किसी के जीवन मे हम भी आक्रांताओं की भूमिका निभाते। क्या फर्क हममें और उनमें। कुछ भी नहीं। न वो शांति से जीते, न जीने देते। वही हम करते। विश्व शांति जैसी अवधारणा तब तक कोरा दिखावा साबित होगी ,जब तक हम खुद स्वयं को शान्तिपूर्ण जीवन के लिए तैय्यार कर दूसरों के लिए मुश्किल खड़ी करना खत्म नहीं करते। 


सुनिए.... जीवन में एक दिन किसी से बिना द्वेष के सिर्फ शांति से जीकर देखिए। यकीन मानिए सालों में अब तक आप उतना सन्तुष्ट नहीं महसूस कर पाए होंगे ,जितना उस विशेष शांतिपूर्ण क्षण में। इस अनमोल जीवन को द्वेष नहीं दया में लगाइए। किसी को तकलीफ मत पहुंचाइये,न ही खुद को किसी अन्य द्वारा तकलीफ पहुंचाने दीजिये।


#अगर इस दुष्कर दौर में भी  आप जीवन और शांति का मूल्य न समझ सके तो अफसोस है कि आप शायद मानव होने की योग्यता खो चुके होंगे। 

#विश्लेषण करिये खुद का,

#विस्तार करिये सोच का ,

#विकास करिये संवेदना का। 

ॐ शांति: शांतिः शांतिः 🙏🏻🙏🏻🙏🏻


#ब्रह्मनाद

#डॉ_मधूलिका_मिश्रा_त्रिपाठी