अरे पता वो आदमी ऐसा है.....राम राम वो औरत वैसी है ... उसके लाइफ कैसी चल रही, यार कोई चटपटी खबर बताओ फलाने के बारे में। तमाम खुसुर -पुसुर ,काना- फूसी,तांक झांक और सुन चंपा -सुन तारा के बीच आपको बता दूं कि आज अंतर्राष्ट्रीय शांति दिवस है।
#अंतर्राष्ट्रीय_शांति_दिवस (International Day of Peace ) को पूरी दुनिया में अहिंसा और संघर्ष विराम के रूप में माना जाता है. दुनिया में जहां भी युद्ध चल रहा है, इस दिन उनसे अपने विवाद खत्म करने की उम्मीद की जाती है, ताकि वे आपसी झगड़ों को खत्म करके शांति से रह सकें।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर की बात अभी जाने दीजिए….. व्यक्तिगत स्तर पर आइये।
इंसान की सबसे बड़ी तलाश क्या है? सुकून ....शांति। कोविड 19 के साथ दो वर्ष सभी के जीवन के लिए बेहद अशान्तिपूर्ण और अस्थिर साबित हुए। थोड़े देर पहले किसी से बात हुई,और उसके बारे में खबर आती की वो इंसान भौतिक जगत से जा चुका। सब सुनते जानते हैं कि जीवन क्षणभंगुर है ,पर महसूस सबने इस महामारी के दौरान किया ही होगा। और ऐसी स्थिति में जीने के बावजूद हमारे अंदर इतना कलुष बचा की हम अपने जीवन के क्षण क्षण को सुकून और शांति से जीने के पश्चात दूसरों के जीवन की खोजबीन और उसे नीचा दिखाने में जाया करते रहे??????
माना कि कोई बहुत महान ,और दूसरा निकृष्ट होगा ....... पर न्यायाधीश बनने का हक हमें किसने दिया!!!! कई बार तो न्याय करने वालों को भी कठघरे में खड़ा पाया।
शारीरिक या मानसिक वृत्ति से हममें से कोई भी इतना पवित्र नहीं कि दूसरे पर उंगली उठाने की पात्रता अर्जित कर सकें। क्यों किसी को इतना मानसिक त्रस्त कर देते हम की आत्मघात के अलावा उसे रास्ता न सूझे। तथाकथित सेलेब्रिटीज़ की मौत पर हम सबने घड़ियाली आंसू बहाए.. पर भूल जाते हम ही कई बार उस भीड़ का हिस्सा होते जो किसी इंसान के कुछ क्षम्य दोष के लिए उससे जानवरों से भी बुरा व्यवहार करने लगते। क्यों हमने शांति से जीवन जीना नहीं जाना। हम अपने पड़ोसी आक्रमणकारी देशों को बुरा मानते ,पर किसी के जीवन मे हम भी आक्रांताओं की भूमिका निभाते। क्या फर्क हममें और उनमें। कुछ भी नहीं। न वो शांति से जीते, न जीने देते। वही हम करते। विश्व शांति जैसी अवधारणा तब तक कोरा दिखावा साबित होगी ,जब तक हम खुद स्वयं को शान्तिपूर्ण जीवन के लिए तैय्यार कर दूसरों के लिए मुश्किल खड़ी करना खत्म नहीं करते।
सुनिए.... जीवन में एक दिन किसी से बिना द्वेष के सिर्फ शांति से जीकर देखिए। यकीन मानिए सालों में अब तक आप उतना सन्तुष्ट नहीं महसूस कर पाए होंगे ,जितना उस विशेष शांतिपूर्ण क्षण में। इस अनमोल जीवन को द्वेष नहीं दया में लगाइए। किसी को तकलीफ मत पहुंचाइये,न ही खुद को किसी अन्य द्वारा तकलीफ पहुंचाने दीजिये।
#अगर इस दुष्कर दौर में भी आप जीवन और शांति का मूल्य न समझ सके तो अफसोस है कि आप शायद मानव होने की योग्यता खो चुके होंगे।
#विश्लेषण करिये खुद का,
#विस्तार करिये सोच का ,
#विकास करिये संवेदना का।
ॐ शांति: शांतिः शांतिः 🙏🏻🙏🏻🙏🏻
#ब्रह्मनाद
#डॉ_मधूलिका_मिश्रा_त्रिपाठी

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