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Thursday, July 12, 2012

जिंदगी मेरी कटी ,अक्सर तनावों में ...


जिंदगी मेरी कटी, अक्सर तनावों में ,

बेमकसद जिंदगी ,चुभन सी सांसों में,

दर्द हर दम सालता ,इन् स्याह रातों में ,

लौ हमारी बुझ गई,बस राख खातों में ,

लग रही है बोलियाँ ,जीने की ख्वाहिस में ,
खुशियाँ अब सब चुक चुकीं ,गम के तकाजों में .

जिंदगी मेरी कटी ,अक्सर तनावों में ...

जिंदगी मेरी कटी ,अक्सर तनावों में ...

(मधुलिका )
 

4 comments:

  1. वाह....
    दर्द भी है और शिकायत भी...!!

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    1. दर्द ही तो शिकायत बन कर उभरता है...और शब्दों में ढल जाए तो काव्य या प्रवाहमय गद्य

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  2. good one..


    pls remove word verification...then it will be easier for ur readers to comment.
    thanks.
    anu

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    Replies
    1. Thnx. alot Anu ji for ur kind suggestion and appreciation.

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