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Sunday, April 29, 2012

कुछ इस तरह

                   

ख्वाब रुकेंगे इन् पलकों में ,उस ओस की तरह...
बिखरेंगे भी तो फैलेंगे ,वो नमी की तरह ...//१//

कभी उलझे ,कभी सुलझे , कटेंगे पल इस तरह ..

कभी लगे नीम ,कभी शहद की मिठास की तरह ..//२//



जिंदगी फिर गुलज़ार होगी ,इन मौसमों की तरह ,

पतझड़ आएँगे भी तो सावन की ,सुगबुगाहट की तरह..//३//



कर रहे हैं जिंदगी पर , यकीं हम कुछ इस तरह...
कि रात भी आती है .... नयी भोर की आहट की तरह ...//४//

(मधुलिका )
 

4 comments:

  1. कभी उलझे ,कभी सुलझे , कटेंगे पल इस तरह ..

    कभी लगे नीम ,कभी शहद की मिठास की तरह .wah wah..

    बहुत ही सुन्दर रचना है मधुलिका जी ..........आपको साधुवाद...

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद

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  2. बढिया काव्याभिव्यक्ति…… आभार

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    1. बहुत बहुत धन्यवाद एवं स्वागत

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